Angul Odisha:इतिहास, विरासत और औद्योगिक भारत का हृदय

ओडिशा के अंगुल का परिचय(Introduction to Angul, Odisha)

Aerial view of Angul district in Odisha with green forests and rivers.Beautiful aerial view of Angul surrounded by forests and rivers.

ओडिशा के बीचों-बीच बसा अंगुल ज़िला, पुरानी परंपराओं और आधुनिक तरक्की के खूबसूरत मेल को बखूबी दिखाता है। एक तरफ यहाँ घने साल के जंगल, सदियों पुरानी परंपराओं वाले आदिवासी समुदाय और इतिहास से जुड़े मंदिर हैं। वहीं दूसरी तरफ, यहाँ बड़े-बड़े पावर प्लांट, कोयले की खदानें और स्टील उद्योग हैं, जो भारत की ऊर्जा और अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा चलाते हैं।

अंगुल सिर्फ एक नाम नहीं है बल्कि यह ओडिशा की औद्योगिक पहचान की रीढ़ है। फिर भी, यात्रियों और इतिहास प्रेमियों के लिए, इसमें एक शांत और अनछुआ आकर्षण है, जिसकी प्रसिद्ध पर्यटन जगत में बहुत कम चर्चा होती है। यह गाइड अंगुल के बारे में आपकी ज़रूरत की हर जानकारी देती है । इसका अतीत, वर्तमान, संस्कृति और यह क्यों ज़्यादा ध्यान दिए जाने के लायक है।

"अंगुल वह जगह है जहाँ पुराने जंगलों के ऊपर उद्योगों का धुआं उठता है, एक ऐसी जगह जो ओडिशा की आत्मा को संजोए रखते हुए चुपचाप देश को ऊर्जा देती है।"

अंगुल का इतिहास: प्राचीन काल से आज़ादी तक(History of Angul: From Ancient Times to Independence)

अंगुल का इतिहास उतना ही विविध और परतों वाला है, जितनी यहाँ के जंगलों की मिट्टी। इसका इतिहास हज़ारों साल पुराना है, जिसमें आदिवासी राज्य, औपनिवेशिक शासन, राजशाही और अंत में आधुनिक भारत में इसका एकीकरण हुआ।

प्राचीन और मध्यकालीन दौर(Ancient and Medieval Period)

आज जिसे अंगुल के नाम से जाना जाता है, वहाँ ऐतिहासिक रूप से कई आदिवासी समुदाय के लोग रहते थे, खासकर भुइयां जनजाति, जिन्हें इस ज़मीन के मूल निवासियों में से एक गिना जाता है। प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों से हमे यह पता चलता है कि यह इलाका कलिंग साम्राज्य के बड़े सांस्कृतिक और व्यापारिक रास्तों का हिस्सा था। यह वही महान साम्राज्य था जो कभी आज के ओडिशा के बड़े हिस्से में फैला हुआ था और जिसकी कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व) में हार के बाद सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म और अहिंसा को अपनाया था।

मध्यकाल के दौरान, अंगुल कई क्षेत्रीय ताकतों के प्रभाव में आया। घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों की वजह से यह काफी हद तक एक स्वतंत्र क्षेत्र बना रहा, जहाँ ज़्यादातर स्थानीय सरदारों और आदिवासी शासकों का शासन था, जिनकी अपनी प्रशासनिक व्यवस्थाएँ थीं।

अंगुल का राज्य(The Kingdom of Angul)

अंगुल के इतिहास का एक बहुत खास अध्याय एक रियासत के तौर पर इसका अस्तित्व है। अंगुल पर राजाओं की एक ऐसी श्रृंखला ने शासन किया जो अपनी वंशावली भुइयां आदिवासी समुदाय से जोड़ते थे। अंगुल के राजाओं ने कई सदियों तक इस क्षेत्र पर स्थानीय शासन किया।

यह राज्य खास तौर पर महान शासक दानसारा और बाद में रामचंद्र देव के लिए जाना जाता है, जिन्होंने इस क्षेत्र की पहचान को काफी हद तक आकार दिया। शाही परिवार का स्थानीय लोगों के बीच काफी सम्मान था और उन्होंने सांस्कृतिक परंपराओं, वन प्रशासन और सामुदायिक कल्याण को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

औपनिवेशिक दौर और ब्रिटिश प्रशासन(Colonial Era and British Administration)

19वीं सदी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने धीरे-धीरे ओडिशा पर अपना प्रभाव बढ़ाया। 1891 में अंगुल आधिकारिक तौर पर ब्रिटिश प्रशासन के अधीन आ गया, जब शाही परिवार के भीतर उत्तराधिकार और शासन को लेकर हुए विवादों के बाद इसे ब्रिटिश शासन में मिला लिया गया। यह एक अहम मोड़ था जब अंगुल ब्रिटिश शासन के तहत बंगाल प्रांत का हिस्सा बन गया।

औपनिवेशिक काल के दौरान, अंग्रेजों ने अंगुल के जंगलों, खासकर वहां के साल (शोरिया रोबस्टा) और सागौन के पेड़ों के रणनीतिक महत्व को समझा। जंगल से होने वाली आय एक मुख्य आर्थिक गतिविधि बन गई, और इस क्षेत्र की लकड़ी का इस्तेमाल पूरे ब्रिटिश भारत में अलग-अलग कामों के लिए उपयोग किया जाने लगा।

आज़ादी के बाद और एक ज़िले के रूप में गठन(Post-Independence and Formation as a District)

1947 में भारत की आज़ादी के बाद, अंगुल को ओडिशा राज्य में मिला दिया गया। शुरुआत में यह ढेंकनाल ज़िले का हिस्सा था, लेकिन 1 अप्रैल 1993 को इसे अलग ज़िला बना दिया गया। यह फ़ैसला इसके बढ़ते प्रशासनिक, आर्थिक और औद्योगिक महत्व को ध्यान में रखकर लिया गया था।

एक स्वतंत्र ज़िले के तौर पर अंगुल का गठन एक नए अध्याय की शुरुआत थी, जिसमें यह पूर्वी भारत के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक ज़िलों में से एक के रूप में विकसित हुआ।

भूगोल और प्राकृतिक बनावट(Geography and Natural Landscape)

अंगुल ओडिशा के मध्य भाग में स्थित है। इसकी सीमाएँ पूर्व में ढेंकनाल, उत्तर में संबलपुर और सुंदरगढ़, पश्चिम में बोलांगीर और बौध, तथा दक्षिण में नयागढ़ और कंधमाल से लगती हैं। यह ज़िला लगभग 6,232 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।

अंगुल का भूगोल मुख्य रूप से पहाड़ियों, नदी की घाटियों और घने जंगलों से बना है। ब्राह्मणी नदी इस ज़िले से होकर बहती है, जो पानी के स्रोत और स्थानीय खेती के लिए जीवन-रेखा, दोनों का काम करती है। अंगुल की ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा जंगलों से घिरा है, जिससे यह ओडिशा के हरे-भरे ज़िलों में से एक बन गया है।

भौगोलिक विशेषताएँ(Key Geographical Features)

ब्राह्मणी नदी(Brahmani River)यह अंगुल की मुख्य नदी है, जो पूरे ज़िले में खेती, वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों के लिए जीवन का आधार है।

घने जंगल(Dense Forest Cover)ज़िले के एक बड़े हिस्से में साल, सागौन और बांस के जंगल फैले हुए हैं, जो जैव-विविधता और आदिवासी समुदायों की आजीविका में मदद करते हैं।

पहाड़ी इलाका(Hilly Terrain)पूर्वी घाट अंगुल के भू-भाग पर असर डालते हैं, जिससे यहाँ सुंदर पहाड़ी चोटियाँ और खनिजों से भरपूर पहाड़ियाँ देखने को मिलती हैं।

कोयले के भंडार(Coal Reserves)अंगुल भारत के सबसे बड़े कोयला क्षेत्रों में से एक  'इब नदी कोयला क्षेत्र' (Ib River Coalfield) पर बसा है, जो यहाँ की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाता है।

आज के समय में अंगुल ज़िले का महत्व(Present-Day Importance of Angul District)

Industrial skyline of Angul, Odisha.
Modern industrial landscape of Angul, Odisha.

अगर किसी एक शब्द से अंगुल की आज की पहचान बताई जा सकती है, तो वह है 'उद्योग'। आज अंगुल ओडिशा के सबसे अहम आर्थिक ज़िलों में से एक है और भारत के एनर्जी, स्टील और एल्युमीनियम सेक्टर में इसका बहुत बड़ा योगदान है।

भारत के एनर्जी पावरहाउस के तौर पर अंगुल(Angul as India's Energy Powerhouse)

अंगुल में देश के कुछ सबसे बड़े थर्मल पावर प्लांट मौजूद हैं। अंगुल में स्थित Nalco (National Aluminium Company Limited) एल्युमीनियम कॉम्प्लेक्स एशिया के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड एल्युमीनियम प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसमें एक कैप्टिव पावर प्लांट, एक स्मेल्टर प्लांट और एक रिफाइनरी शामिल है। और ये सभी बहुत बड़े पैमाने पर काम करते हैं।

अंगुल ज़िले में तालचेर के पास स्थित NTPC कनिहा (जिसे पहले तालचेर सुपर थर्मल पावर स्टेशन के नाम से जाना जाता था) भारत के सबसे बड़े बिजली उत्पादन केंद्रों में से एक है, जिसकी क्षमता 3,000 MW से ज़्यादा है। यह पूर्वी और उत्तरी भारत में बिजली की सप्लाई करने में अहम भूमिका निभाता है।

कोयला खनन और तालचेर कोलफील्ड्स(Coal Mining and the Talcher Coalfields)

अंगुल ज़िले में स्थित Talcher Coalfield भारत के सबसे बड़े कोयला भंडारों में से एक हैं। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और उसकी सहायक कंपनी महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम करती हैं। यहाँ से निकाला गया कोयला न केवल स्थानीय स्तर पर बिजली बनाने के काम आता है, बल्कि इसे देश भर में भी भेजा जाता है।

स्टील और एल्युमीनियम उद्योग(Steel and Aluminium Industry)

अंगुल में भारत की प्रमुख स्टील निर्माता कंपनियों में से एक, Jindal Steel And Power Limited(JSPL) भी स्थित है। अंगुल में स्थित JSPL का प्लांट देश के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन स्टील प्लांट्स में से एक है, जहाँ हर साल लाखों टन स्टील का उत्पादन होता है। इस वजह से अंगुल भारत की स्टील सप्लाई चेन में एक अहम केंद्र बन गया है।

कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था(Agriculture and Rural Economy)

उद्योग से परे, अंगुल की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी कृषि को आगे बढ़ावा देते हैं। सबसे ज्यादा उस क्षेत्र के लोग धान की खेती करते हैं, इसके बाद दलहन और तिलहन आते हैं। वन क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय निर्वाह खेती करते हैं, और बांस, शहद और औषधीय जड़ी-बूटियाँ जैसे वन उत्पाद भी स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं।

अंगुल में पर्यटन और घूमने की जगहें(Tourism and Places to Visit in Angul)

Scenic view of Satkosia Tiger Reserve and the Mahanadi River gorge in Odisha.The stunning Mahanadi River gorge inside Satkosia Tiger Reserve.

हालांकि अंगुल मुख्य रूप से अपने औद्योगिक माहौल के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ कई ऐसी प्राकृतिक और ऐतिहासिक जगहें भी हैं जो ओडिशा में कुछ अलग और अनोखा अनुभव चाहने वाले पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं।

1. बैसीपल्ली Wildlife Sanctuary 

जिले की सबसे खास प्राकृतिक जगहों में से एक, बैसीपल्ली Wildlife Sanctuary लगभग 168 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। यहाँ तेंदुए, सांभर हिरण, जंगली सूअर और पक्षियों की कई तरह की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यहाँ के घने जंगल और घुमावदार रास्ते इसे वाइल्डलाइफ के शौकीनों और नेचर फोटोग्राफरों के लिए पसंदीदा जगह बनाते हैं।

2. प्रधानपट झरना(Pradhanpat Waterfall)

अंगुल शहर के पास स्थित, प्रधानपट झरना घने हरे-भरे जंगलों से घिरा एक खूबसूरत झरना है। यह स्थानीय लोगों के लिए पिकनिक मनाने की एक लोकप्रिय जगह है और मॉनसून के दौरान या उसके बाद, जब झरने में पानी का बहाव तेज़ होता है, तो यहां का नज़ारा और भी खुबसूरत दिखने लगता है। झरने तक जाने का रास्ता शांत जंगल से होकर गुज़रता है, जिससे यहाँ तक का सफ़र भी मंज़िल की तरह ही मज़ेदार होता है।

3. हंडापा पुरातात्विक स्थल(Handapa Archaeological Site)

इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए, अंगुल ज़िले में स्थित हंडापा स्थल पर प्राचीन खंडहर और पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र के शुरुआती सभ्यता के इतिहास की कहानी बताते हैं। यहाँ पत्थर पर लिखे लेख और संरचनात्मक अवशेष मिले हैं, और यह कलिंग युग का अध्ययन करने वाले इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल बना हुआ है।

4. देवझर(Deojhar)

देवझर एक धार्मिक और प्राकृतिक जगह है जो स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए बहुत अहम है। पथरीले इलाके और जंगलों के बीच बसी यह जगह पवित्र मानी जाती है और यहां  दूर दूर से तीर्थयात्रा और घूमने-फिरने के लिए कई जनसंख्या में लोग आते हैं।

5. नालको टाउनशिप और अंगुल शहर(Nalco Township and Angul Town)

NALCO Township अच्छी तरह से प्लान किया गया रिहायशी इलाका है, जिसे एल्युमीनियम बनाने वाली बड़ी कंपनी के कर्मचारियों के रहने के लिए बनाया गया है। यह जगह बहुत साफ़-सुथरी, हरी-भरी और व्यवस्थित है। जो आस-पास के औद्योगिक माहौल से बिल्कुल अलग और सुखद अनुभव देती है। जो लोग यह देखना चाहते हैं कि सरकारी क्षेत्र की बड़ी कंपनियाँ किस तरह पूरे समुदायों को आकार देती हैं, उनके लिए यह Township घूमने लायक जगह है।

6. सतकोसिया Tiger Reserve(Adjoining)

हालाँकि यह मुख्य रूप से अंगुल और नयागढ़ जिलों के अंतर्गत आता है, Satkosia Gorge- ओडिशा के सबसे आश्चर्यजनक प्राकृतिक परिदृश्यों में से एक - अंगुल से पहुँचा जा सकता है। यह कण्ठ पूर्वी घाट के माध्यम से महानदी द्वारा बनाया गया है, जो नाटकीय चट्टानों और मगरमच्छों, बाघों, हाथियों और कई पक्षी प्रजातियों के लिए एक निवास स्थान बनाता है। इको-टूरिज्म के शौकीनों के लिए यह एक जरूरी यात्रा है।

अंगुल की संस्कृति, त्यौहार और परंपराएँ(Culture, Festivals, and Traditions of Angul)

Traditional Culture of Angul, Odisha Folk Dance and Festival Celebration
Folk dancers celebrating the culture of Angul, Odisha.

अंगुल की संस्कृति उड़िया भाषी समुदायों की परंपराओं और आदिवासी समूहों, विशेष रूप से भुइयां, गोंड और कोंध समुदायों के रीति-रिवाजों से बुनी गई एक समृद्ध टेपेस्ट्री है। यह मिश्रण जिले को एक अद्वितीय सांस्कृतिक चरित्र प्रदान करता है।

अंगुल में मनाए जाने वाले त्योहार(Festivals Celebrated in Angul)

नुआखाई: पश्चिमी और मध्य ओडिशा का सबसे अहम फसल का त्योहार, नुआखाई में देवता को नए चावल का पहला भोग लगाया जाता है। अंगुल में इसे बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है।

राजा पर्व: यह तीन दिन का त्योहार नारीत्व और धरती की उर्वरता का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। इसे अंगुल समेत पूरे ओडिशा में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

दशहरा (DurgaPuja): ओडिशा के बाकी हिस्सों की तरह, अंगुल में भी दुर्गा पूजा का जश्न धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें शानदार ढंग से सजाए गए पंडाल और सामुदायिक आयोजन होते हैं।

आदिवासी त्योहार: भुइयां और अन्य आदिवासी समुदाय खेती के चक्र, पूर्वजों की पूजा और मौसम में बदलाव से जुड़े अपने त्योहार मनाते हैं। जो औपनिवेशिक काल से पहले के ओडिशा के जीवन की झलक दिखाते हैं।

पारंपरिक कला और शिल्प(Traditional Art and Craft)

अंगुल के आदिवासी समुदाय बांस और बेंत के शिल्प, हाथ से बुने कपड़ों और मनकों, बीजों व धातुओं से बनी पारंपरिक ज्वेलरी में अपनी कुशलता के लिए जाने जाते हैं। ये शिल्प सिर्फ़ सजावट की चीज़ें नहीं हैं। ये सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और समुदाय की पहचान से गहराई से जुड़े हैं।

खान-पान(Cuisine)

अंगुल का स्थानीय खान-पान इसकी ओडिया जड़ों को दर्शाता है। मुख्य भोजन में चावल, दाल, सब्ज़ियां और मीठे पानी की मछलियां शामिल हैं। आदिवासी समुदायों की अपनी खान-पान की परंपराएं हैं, जिनमें जंगल से मिलने वाली चीज़ें, स्थानीय रूप से उगाए गए अनाज (जैसे मोटे अनाज या मिलेट्स) और जंगलों से इकट्ठा की गई मौसमी हरी सब्ज़ियां शामिल होती हैं। आदिवासी समुदायों में त्योहारों के दौरान पारंपरिक चावल की बीयर (जिसे स्थानीय भाषा में 'हंडिया' कहा जाता है) पी जाती है।

ओडिशा के अंगुल घूमने का सबसे अच्छा समय(Best Time to Visit Angul, Odisha)

अंगुल साल भर घूमा जा सकता है, लेकिन हर मौसम में अलग अनुभव मिलता है। यहाँ एक संक्षिप्त जानकारी दी गई है:

सर्दी (अक्टूबर – फरवरी)Winter (Oct-Feb)

घूमने के लिए सबसे अच्छा समय। मौसम सुहावना होता है; यह जगह देखने, Wildlife देखने और झरने तक हाइकिंग करने के लिए बहुत अच्छा है।

गर्मी (मार्च – जून)Summer(Mar-Jun)

गर्मी और सूखा मौसम। बाहर घूमने-फिरने के लिए बहुत अच्छा नहीं है, लेकिन सुबह और शाम के समय घूमा जा सकता है।

मानसून (जुलाई – सितंबर)Monsoon (Jul- Sep)

चारों तरफ हरियाली और ज़ोर से बहते झरने। सड़कों पर चलना मुश्किल हो सकता है; लेकिन प्रकृति प्रेमियों के लिए यह बहुत अच्छी जगह है।

ओडिशा के अंगुल कैसे पहुँचें(How To Reach Angul Odisha)

ट्रेन से(By Rail)

अंगुल का अपना रेलवे स्टेशन है, जो East Coast Railway लाइन पर है। यह भुवनेश्वर, संबलपुर, कोलकाता और रायपुर जैसे बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ रोज़ कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें रुकती हैं।

सड़क मार्ग से(By Road)

अंगुल नेशनल हाईवे 55 (NH-55) से पहुँचा जा सकता है। यह भुवनेश्वर से लगभग 130 किमी और संबलपुर से लगभग 220 किमी दूर है। अंगुल और ओडिशा के बड़े शहरों के बीच नियमित बस सेवाएँ चलती हैं। ज़िले में सड़क नेटवर्क काफी अच्छा है, खासकर औद्योगिक इलाकों के पास।

हवाई मार्ग से(By Air)

अंगुल का सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर में Biju Patnaik International Airport है, जो लगभग 130–140 किमी दूर है। एयरपोर्ट से यात्री कैब किराए पर ले सकते हैं या अंगुल के लिए बस ले सकते हैं।

निष्कर्ष(Conclusion)

ओडिशा का अंगुल जिला असाधारण विविधताओं और दिलचस्प कहानियों का संगम है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ प्राचीन और आधुनिक का संगम होता है।जहाँ आदिवासी संस्कृति भारी उद्योग के साथ-साथ मौजूद है, और जहाँ हरे-भरे जंगल विशाल विद्युत संयंत्रों के साथ फैले हुए हैं। एक छोटे से आदिवासी राज्य से भारत के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक जिलों में से एक बनने तक की इसकी ऐतिहासिक यात्रा, परिवर्तन की एक ऐसी कहानी है जो भारत के अपने विकास वृत्तांत को प्रतिबिंबित करती है।

चाहे आप भुयान साम्राज्य के बारे में जानने के इच्छुक इतिहासकार हों, प्रधानपत जलप्रपात की शांत सुंदरता की तलाश में निकले यात्री हों, या भारत की ऊर्जा अर्थव्यवस्था का विश्लेषण करने वाले व्यावसायिक विश्लेषक हों, अंगुल में आपके लिए कुछ न कुछ सार्थक है। यह निस्संदेह ओडिशा के सबसे कम आंके जाने वाले स्थलों में से एक है।और निश्चित रूप से आपकी यात्रा योजना और पठन सूची में शामिल होने योग्य है।

"अंगुल इस बात का प्रमाण है कि भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्थान हमेशा सबसे प्रसिद्ध नहीं होते। कुछ अनमोल रत्नों को खोजने में थोड़ा प्रयास करना पड़ता है।और वह प्रयास हमेशा सार्थक होता है।"

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: अंगुल कहाँ स्थित है?

अंगुल भारत के मध्य ओडिशा राज्य में स्थित है।

Q2: अंगुल क्यों प्रसिद्ध है?

अंगुल उद्योगों, कोयला भंडारों, जंगलों और पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध है।

Q3: अंगुल के प्रमुख उद्योग कौन से हैं?

NALCO, NTPC कनिहा, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड प्रमुख उद्योगों में से हैं।

Q4: अंगुल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कौन से हैं?

सतकोसिया टाइगर रिजर्व, टिकरपाड़ा वन्यजीव अभ्यारण्य, डेरजंग बांध, रेंगाली बांध और देउलझारी गर्म पानी का झरना लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं।

Q5: अंगुल से कौन सी नदियाँ बहती हैं?

महानदी और ब्राह्मणी नदियाँ इस जिले से जुड़ी हैं।

Q6: अंगुल घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

अक्टूबर से फरवरी तक का समय अंगुल घूमने के लिए आदर्श माना जाता है।

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