विक्रमशिला विश्वविद्यालय: प्राचीन भारत का प्रमुख शिक्षा केंद्र

 विक्रमशिला: प्राचीन भारत का प्रमुख शिक्षा केंद्र

हरियाली और पहाड़ियों के बीच स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक परिसर
 हरियाली के बीच स्थित विक्रमशिला महाविहार

परिचय

हमारा भारत बहुत पहले से ही ज्ञान और शिक्षा का केंद्र रहा है। भारत में काफी बड़े बड़े विश्वविद्यालय स्थापित हुए, जिनमें विक्रमशिला विश्वविद्यालय का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। बिहार के भागलपुर जिले के अंतिचक (Antichak) गाँव के पास स्थित विक्रमशिला प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र था। यह विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म, दर्शन, व्याकरण और तंत्र विद्या के अध्ययन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध था।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने 8वीं शताब्दी में की थी। यह विश्वविद्यालय उस समय नालंदा विश्वविद्यालय के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित शिक्षा केंद्र माना जाता था। यहाँ देश-विदेश से हजारों विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे।

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विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना

विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना लगभग 783 ईस्वी के आसपास पाल वंश के शक्तिशाली शासक धर्मपाल ने की थी। उस समय बौद्ध धर्म के अध्ययन और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक नए विश्वविद्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

राजा धर्मपाल ने इस उद्देश्य से विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की, ताकि बौद्ध शिक्षा को व्यवस्थित और उच्च स्तर पर पढ़ाया जा सके। इस विश्वविद्यालय को राजकीय संरक्षण प्राप्त था, जिसके कारण यहाँ शिक्षा और अनुसंधान का स्तर बहुत ऊँचा था।

शिक्षा और अध्ययन प्रणाली

विक्रमशिला विश्वविद्यालय परिसर में स्थित पुरातात्विक संग्रहालय भवन
      विक्रमशिला का पुरातात्विक संग्रहालय

विक्रमशिला विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रणाली अत्यंत व्यवस्थित और अनुशासित थी। यहाँ प्रवेश लेना आसान नहीं था। प्रवेश से पहले छात्रों की कठिन परीक्षा ली जाती थी, जिसे विद्वान आचार्य आयोजित करते थे।

यहाँ मुख्य रूप से निम्न विषयों की शिक्षा दी जाती थी:

• बौद्ध दर्शन

• तंत्र विद्या

• व्याकरण

• तर्कशास्त्र

• वेद और उपनिषद

• चिकित्सा विज्ञान

• ज्योतिष

माना जाता है कि विक्रमशिला विश्वविद्यालय में लगभग 100 से अधिक शिक्षक और 1000 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते थे। यहाँ शिक्षा पूरी तरह निःशुल्क थी और विद्यार्थियों के रहने-खाने की व्यवस्था भी विश्वविद्यालय द्वारा की जाती थी।

प्रसिद्ध आचार्य और विद्वान

विक्रमशिला विश्वविद्यालय कई महान विद्वानों का केंद्र रहा है। यहाँ से कई प्रसिद्ध आचार्य और विद्वान निकले जिन्होंने बौद्ध धर्म और ज्ञान को पूरे विश्व में फैलाया।

इनमें सबसे प्रसिद्ध विद्वान आचार्य अतीश दीपंकर श्रीज्ञान थे। उन्होंने तिब्बत जाकर बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया और वहाँ की शिक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित किया।

इसके अलावा यहाँ अनेक विद्वान शिक्षक थे जो तर्कशास्त्र, दर्शन और धर्म के क्षेत्र में विशेषज्ञ माने जाते थे।

विश्वविद्यालय की संरचना

विक्रमशिला विश्वविद्यालय के उत्खनन में मिले पत्थर के अवशेष और प्राचीन संरचनाएँउत्खनन में मिले विक्रमशिला के अवशेष

विक्रमशिला विश्वविद्यालय की संरचना बहुत ही भव्य और सुव्यवस्थित थी। पुरातत्व विभाग की खुदाई से पता चलता है कि यहाँ एक विशाल मठ (महाविहार) था, जिसके चारों ओर विद्यार्थियों के रहने के लिए कक्ष बनाए गए थे।

विश्वविद्यालय परिसर में निम्न संरचनाएँ थीं:

• विशाल केंद्रीय स्तूप

• अध्ययन कक्ष

• पुस्तकालय

• ध्यान और पूजा स्थल

• विद्यार्थियों के रहने के कक्ष

यह पूरा परिसर ईंटों से बना हुआ था और इसकी वास्तुकला अत्यंत आकर्षक थी।

नालंदा विश्वविद्यालय से संबंध

विक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय दोनों ही प्राचीन भारत के महान शिक्षा केंद्र थे। कई विद्वान इन दोनों विश्वविद्यालयों में अध्ययन और अध्यापन करते थे।

नालंदा जहाँ सामान्य बौद्ध शिक्षा के लिए प्रसिद्ध था, वहीं विक्रमशिला विशेष रूप से तंत्र और बौद्ध दर्शन के अध्ययन के लिए जाना जाता था। इस प्रकार दोनों विश्वविद्यालय एक-दूसरे के पूरक माने जाते थे।

पतन का कारण

बिहार के भागलपुर में स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय का मुख्य स्तूप और प्रवेश द्वार
     विक्रमशिला विश्वविद्यालय का मुख्य स्तूप

विक्रमशिला विश्वविद्यालय का पतन 12वीं शताब्दी में हुआ। 1193 ईस्वी के आसपास तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने बिहार के कई बौद्ध विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया। उसी समय विक्रमशिला विश्वविद्यालय भी नष्ट कर दिया गया।

इस आक्रमण के कारण विश्वविद्यालय की विशाल पुस्तकालय, मठ और अन्य संरचनाएँ नष्ट हो गईं। इसके साथ ही प्राचीन भारत का यह महान शिक्षा केंद्र इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गया।

वर्तमान स्थिति

विक्रमशिला महाविहार की ओर जाने वाला रास्ता और सामने स्थित केंद्रीय स्तूप
        विक्रमशिला महाविहार का प्रवेश मार्ग

आज विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अवशेष बिहार के भागलपुर जिले में स्थित हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा यहाँ खुदाई कर कई महत्वपूर्ण संरचनाएँ खोजी गई हैं।

यह स्थान आज एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल बन चुका है। हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक और शोधकर्ता यहाँ प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली को देखने और समझने के लिए आते हैं।

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👉विक्रमशिला विश्वविद्यालय तक पहुंचने के लिए Map

निष्कर्ष

विक्रमशिला विश्वविद्यालय प्राचीन भारत की समृद्ध शिक्षा परंपरा का एक शानदार उदाहरण है। यह विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं था, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और धर्म के प्रचार-प्रसार का भी महत्वपूर्ण स्थान था।

हालाँकि समय के साथ यह विश्वविद्यालय नष्ट हो गया, लेकिन इसके अवशेष आज भी हमें भारत के गौरवशाली शैक्षिक इतिहास की याद दिलाते हैं। विक्रमशिला विश्वविद्यालय यह दर्शाता है कि प्राचीन भारत में शिक्षा और ज्ञान को कितना महत्व दिया जाता था।

FAQ❓️

Q1. विक्रमशिला विश्वविद्यालय कहाँ स्थित है?

विक्रमशिला विश्वविद्यालय बिहार के भागलपुर जिले के अंतिचक गाँव के पास स्थित है।

Q2. विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की थी?

इस विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने 8वीं शताब्दी में की थी।

Q3. विक्रमशिला विश्वविद्यालय किस लिए प्रसिद्ध था?

यह विश्वविद्यालय बौद्ध दर्शन, तंत्र विद्या और तर्कशास्त्र की शिक्षा के लिए प्रसिद्ध था।

Q4. विक्रमशिला विश्वविद्यालय को किसने नष्ट किया?

12वीं शताब्दी में बख्तियार खिलजी ने इस विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया।

Q5. क्या आज भी विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अवशेष मौजूद हैं?

हाँ, आज भी इसके अवशेष बिहार के भागलपुर जिले में मौजूद हैं और यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है।

📷Image Source:Wikimedia commons 

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