सासाराम का शेरशाह सूरी का मकबरा: इतिहास, वास्तुकला और पर्यटन की पूरी जानकारी

 सासाराम में शेरशाह सूरी का मकबरा: इतिहास, वास्तुकला और महत्व

बिहार के सासाराम में स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा जो बड़े तालाब के बीच बना एक ऐतिहासिक स्मारक है
सासाराम में स्थित भव्य शेरशाह सूरी का मकबरा

परिचय

बिहार के सासाराम शहर में स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा भारत के सबसे भव्य ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। यह मकबरा अफगान शासक शेरशाह सूरी की याद में बनाया गया था, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में भारत पर शासन किया था। यह स्मारक न केवल अपनी विशालता और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह मध्यकालीन भारतीय वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण भी माना जाता है।

पानी से घिरे एक बड़े कृत्रिम तालाब के बीच बने इस मकबरे की खूबसूरती दूर-दूर से पर्यटकों को आकर्षित करती है। इतिहासकारों के अनुसार यह मकबरा भारतीय और अफगान स्थापत्य शैली का शानदार मिश्रण है।

👉बोधगया – भगवान बुद्ध का ज्ञान स्थल | इतिहास, महत्व और यात्रा गाइड

👉नालंदा प्राचीन विश्वविद्यालय: विश्व की प्रथम आवासीय शिक्षा नगरी का गौरवशाली इतिहास

शेरशाह सूरी कौन थे

भारत के महान अफगान शासक शेरशाह सूरी का ऐतिहासिक चित्र, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में सूर साम्राज्य की स्थापना की और ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण करवाया
    महान शासक शेरशाह सूरी

शेरशाह सूरी का जन्म 1486 ईस्वी में बिहार के सासाराम में हुआ था। उनका असली नाम फरीद खान था। वे एक कुशल सेनापति और दूरदर्शी शासक थे। 1540 ईस्वी में उन्होंने हुमायूँ को हराकर दिल्ली की गद्दी पर कब्जा कर लिया और सूर वंश की स्थापना की।

शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। उन्होंने

• प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाया

• नई मुद्रा प्रणाली लागू की

• भारत की प्रसिद्ध सड़क ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण करवाया

उनके शासनकाल को भारत के सबसे कुशल प्रशासनिक कालों में से एक माना जाता है।

मकबरे का निर्माण

शेरशाह सूरी के मकबरे की लाल बलुआ पत्थर से बनी शानदार अफगान शैली की वास्तुकला
   शेरशाह सूरी के मकबरे की सुंदर वास्तुकला

शेरशाह सूरी ने अपने जीवनकाल में ही अपने मकबरे का निर्माण शुरू करवा दिया था। लेकिन 1545 ईस्वी में उनकी मृत्यु के बाद इसका निर्माण पूरा किया गया।

इस भव्य मकबरे का निर्माण उनके पुत्र इस्लाम शाह सूरी ने करवाया। यह मकबरा लगभग 1540 से 1545 ईस्वी के बीच बनाया गया।

यह मकबरा एक विशाल कृत्रिम तालाब के बीच में स्थित है और इसे लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। पानी के बीच स्थित होने के कारण इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है।

वास्तुकला की विशेषताएँ

शेरशाह सूरी का मकबरा भारतीय उपमहाद्वीप की शानदार वास्तुकला का उदाहरण है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

1. विशाल गुंबद

इस मकबरे का सबसे आकर्षक हिस्सा इसका विशाल गुंबद है। यह भारत के सबसे बड़े गुंबदों में से एक माना जाता है।

2. अष्टकोणीय संरचना

मकबरे की पूरी संरचना अष्टकोण (Octagonal) आकार की है। यह शैली अफगान वास्तुकला की खास पहचान मानी जाती है।

3. पानी से घिरा स्मारक

यह मकबरा एक बड़े कृत्रिम तालाब के बीच बनाया गया है। चारों तरफ पानी होने के कारण यह एक द्वीप जैसा दिखाई देता है।

4. लाल बलुआ पत्थर का उपयोग

इस स्मारक में मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी भव्यता और भी बढ़ जाती है।

5. सुंदर नक्काशी

मकबरे की दीवारों और मेहराबों पर सुंदर नक्काशी और सजावट देखने को मिलती है, जो उस समय की कला और शिल्पकला को दर्शाती है।

ऐतिहासिक महत्व

शेरशाह सूरी का मकबरा भारतीय इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे अक्सर भारत के सबसे सुंदर मकबरों में से एक माना जाता है।

कई इतिहासकारों का मानना है कि यह मकबरा बाद में बने प्रसिद्ध स्मारक ताज महल की वास्तुकला के लिए प्रेरणा बना।

यह स्मारक उस दौर की अफगान शैली की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके साथ ही यह शेरशाह सूरी के महान शासन और उनके योगदान की याद दिलाता है।

सासाराम का शेरशाह सूरी मकबरा जो चारों ओर पानी से घिरे तालाब के बीच बना हुआ है
    तालाब के बीच स्थित ऐतिहासिक मकबरा
 
सासाराम में स्थित शेरशाह सूरी मकबरे का मुख्य प्रवेश द्वार और पुल का दृश्य
मकबरे का मुख्य प्रवेश मार्ग

पर्यटक स्थल के रूप में महत्व

आज शेरशाह सूरी का मकबरा बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। हर साल हजारों पर्यटक यहाँ घूमने आते हैं।

पर्यटक यहाँ

• ऐतिहासिक वास्तुकला को देखने

• फोटोग्राफी करने

• इतिहास को समझने

• और शांत वातावरण का आनंद लेने आते हैं।

यह स्थान विशेष रूप से इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

यहाँ कैसे पहुँचे

शेरशाह सूरी का मकबरा बिहार के रोहतास जिले के सासाराम शहर में स्थित है।

रेल मार्ग:

सासाराम रेलवे स्टेशन यहाँ से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर है।

सड़क मार्ग:

सासाराम राष्ट्रीय राजमार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, इसलिए यहाँ बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती है।

हवाई मार्ग:

सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 150 किलोमीटर दूर है।

संरक्षण और देखभाल

इस ऐतिहासिक स्मारक की देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की जाती है। यह संस्था भारत के प्राचीन स्मारकों की सुरक्षा और संरक्षण का कार्य करती है।

सरकार और पुरातत्व विभाग इस स्मारक को सुरक्षित रखने और इसकी सुंदरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं।

👉पावापुरी जैन धर्म का पवित्र स्थल – निर्वाण भूमि की दिव्य कहानी

👉राजगीर का गृद्धकूट पर्वत – भगवान बुद्ध का पवित्र स्थल

निष्कर्ष (Conclusion)

सासाराम में स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा भारतीय इतिहास और वास्तुकला का एक अनमोल रत्न है। यह स्मारक न केवल शेरशाह सूरी की महानता और उनके शासनकाल की याद दिलाता है, बल्कि मध्यकालीन भारत की शानदार स्थापत्य कला को भी दर्शाता है।

पानी के बीच स्थित इसकी भव्य संरचना, विशाल गुंबद और सुंदर नक्काशी इसे भारत के सबसे आकर्षक ऐतिहासिक स्मारकों में से एक बनाते हैं। इतिहास प्रेमियों, पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए यह स्थान एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

यदि आप कभी बिहार के सासाराम जाएँ, तो शेरशाह सूरी के इस अद्भुत मकबरे को जरूर देखें। यह स्मारक भारत के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

FAQ❓️

1. शेरशाह सूरी का मकबरा कहाँ स्थित है?

यह मकबरा बिहार के सासाराम शहर में स्थित है।

2. शेरशाह सूरी का मकबरा किसने बनवाया था?

इस मकबरे का निर्माण इस्लाम शाह सूरी ने अपने पिता शेरशाह सूरी की याद में करवाया था।

3. शेरशाह सूरी का मकबरा कब बनाया गया था?

इसका निर्माण लगभग 1540 से 1545 ईस्वी के बीच हुआ था।

4. शेरशाह सूरी का मकबरा क्यों प्रसिद्ध है?

यह अपनी भव्य अफगान शैली की वास्तुकला और तालाब के बीच बने शानदार मकबरे के कारण प्रसिद्ध है।

5. क्या यह भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है?

हाँ, यह भारत के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है।

📷Image Source:Wikimedia commons 

टिप्पणियाँ

Popular posts

Panchgagh waterfall - 5 धाराओं में बहता प्राकृतिक स्वर्ग

ककोलत जलप्रपात: बिहार का छुपा हुआ स्वर्ग

आरा का इतिहास और पर्यटन स्थल

Harappan सभ्यता: नगर नियोजन, कला, अर्थव्यवस्था और पतन